सबसे बड़ा ये जज बैठा है,
इससे बड़ा न्यायधीश नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं।।
तर्ज – क्या मिलिए ऐसे लोगों से।
तेरी अदालत में साँवरिया,
सबका लेखा जोखा है,
यहाँ पे केवल सच ही चलता,
यहाँ ना चलता धोखा है,
ऐसा यहाँ पर कोई नहीं है,
झुकता जिसका शीश नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं।।
यहाँ ना चलती रिश्वत कोई,
यहाँ ना होता भ्रष्टाचार,
तुरंत फैसला होता है,
ना करना पड़ता इंतजार,
कल पे ना कुछ भी टाला जाता,
मिलती यहाँ तारीख नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं।।
‘धीरज’ के जीवन का फैसला,
साँवरिया तेरे हाथो में,
माफी दे या सजा सुना दे,
काम चले ना बातों से,
हुकुम सुना दे सांवरे अपना,
यहा कोई बंदिश नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं।।
सबसे बड़ा ये जज बैठा है,
इससे बड़ा न्यायधीश नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं,
सबका मुकदमा फ्री में सुनता,
लगती यहा कोई फीस नहीं।।
Singer – Anjali Dwivedi Ji
Lyrics – Dheeraj Saxena Ji








