जबसे मिली बाबोसा की भक्ति,
खुशियो की बरसात हुई,
हुए सुहाने हर दिन मेरे,
रोशन हर एक रात हुई,
हमको मिले है जो बाबोसा,
शुक्रिया ओ मंजू बाईसा,
कृपा तेरी तो,
डरने की क्या बात है,
बाईसा और बाबोसा का,
सर पे हाथ है।।
जबसे मिले हैं बाबोसा,
आनंद मंगल छाया हैं,
ग्यारह मंगलवार के व्रत से मेने,
यश वैभव मेने पाया हैं,
चारो तरफ अब,
जीत ही जीत हैं,
ना कोई गम जब,
बाबोसा मीत हैं,
क्या चिंता बाईसा,
ज़ब साथ हैं,
बाईसा ओर बाबोसा का,
सर पे हाथ है।।
बाबोसा की कृपा से हम,
हरपल मौज में रहते है,
लाडले है हम बाईसा के,
बड़े शान से कहते है,
श्री बाबोसा मेरे आधार है,
मात पिता यही तारणहार है,
“दिलबर” के बस,
यही जज्बात है,
बाईसा ओर बाबोसा का,
सर पे हाथ है।।
जबसे मिली बाबोसा की भक्ति,
खुशियो की बरसात हुई,
हुए सुहाने हर दिन मेरे,
रोशन हर एक रात हुई,
हमको मिले है जो बाबोसा,
शुक्रिया ओ मंजू बाईसा,
कृपा तेरी तो,
डरने की क्या बात है,
बाईसा और बाबोसा का,
सर पे हाथ है।।
गायिका – श्रेया रांका भीलवाड़ा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री अजय गोलछा हैदराबाद।








