ओ म्हारा सांवरिया,
नैना र बाण मत मार रे,
रे बाबा,
मैं तो दीवानों थारे नाम रो।।
बड़ी दूर से चाल्यो आयो,
एक झलक के खातिर,
तू बैठयो है पर्दे ओले,
बन कर भोलो टाबर,
थाने छुपने देवा नाय,
दर्शन बेगा दिज्यो आय,
म्हाने थारी सूरत भाय,
थारे दरस बिना,
जीवन यो म्हारो किण काम रो,
रे बाबा,
मैं तो दीवानों थारे नाम रो।।
म्हारी प्रीत लगी था सागे,
और कठे मैं जाऊं,
थारे सिर रो बणु सेवरों,
मोरमुकुट बण ज्याऊँ,
थारे केसर थारे अंग लगाऊं,
बागों केसरिया पहनाऊं,
थाने बारम्बार रिझाऊं,
हां रे मुखड़े रो,
तेज निरालो बाबा श्याम रो,
रे बाबा,
मैं तो दीवानों थारे नाम रो।।
खाटू नगरी री गलियां तो,
म्हारो मनडो मोवे,
पाछा मुड़ता टेम साँवरा,
म्हारो काळजो रोवे,
तू है हार्यां रो सरकार,
म्हाने भूली न करतार,
या शर्मिला करे पुकार,
म्हारे जीवण में,
रंग चढ़यो है म्हारे श्याम रो,
रे बाबा,
मैं तो दीवानों थारे नाम रो।।
ओ म्हारा सांवरिया,
नैना र बाण मत मार रे,
रे बाबा,
मैं तो दीवानों थारे नाम रो।।
गायक – नवरत्न पारीक।
लेखन – डॉ.शर्मिला प्रकाश सोनी।








