सिमरु मैं शिव सदन गणनायक,
दोहा – प्रथम पुज्य गुरु वन्दना,
मेरे करो गुनाह बक्शीश,
देवनाथ सतगुरु मिले,
कहूं चरण निवाकर शीश।
ध्यान मुलम गुरु मुर्ति,
पुजा मूलम गुरु पदम,
मंत्र मूलम गुरु वाक्य,
मोक्ष मूलम गुरु कृपा।
सिमरु मैं शिव सदन गणनायक,
प्यारे पार्वती के लाल।।
जे सिमरत सिद्ध होत गजानंद,
छूट जात भ्रम जाल,
सिया रामा,
छूट जात भ्रम जाल,
सिंवरू मैं शिव सदन गणनायक,
प्यारे पार्वती के लाल।।
हाथ में चक्र त्रिशूल बिराजे,
गले बैजन्ती माल,
सिया रामा,
गले बैजन्ती माल,
सिंवरू मैं शिव सदन गणनायक,
प्यारे पार्वती के लाल।।
रिद्धि – सिद्धी बायें अंग बिराजे,
मस्तक तिलक सोहे भाल,
सिया रामा,
मस्तक तिलक सोहे भाल,
सिंवरू मैं शिव सदन गणनायक,
प्यारे पार्वती के लाल।।
गुरु खरतो नित तेरी सेवा में,
बाज रहे सुरताल,
सिया रामा,
बाज रहे सुर-ताल,
सिंवरू मैं शिव सदन गणनायक,
प्यारे पार्वती के लाल।।
गायक – सहीराम धन्नासर।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।
मो.- 8107115329








