अरें गया परा धुंधलिये धोरों रें माय रें,
रखियो रा जाया,
अरे वेते मारगिये रोमत मोडियों रे हा।।
अरे पूरियों म्हारे आलम धणी रो पाठ रे,
रखियों रा जाया,
अरे पगला मोण्डयों है रोमापीर रो रे हा।।
अरे पीली प्रभातों रे माय रे,
रखियों रा जाया,
अरें रखियों सोरे रे रोम का मोडिया रे हा।।
अरे पुरे-पूरें अलख धनी से पाठ रें,
रखियों रा जाया,
अरे ओरा मोडे आईनाथ रा रे हा।।
अरे छूटी छूटी सोलह सरों री सोड रे,
रखियों रा जाया,
अरे रखियों धोरों रा रोमका भागिया रे हा।।
अरें लीना-लीना वीणा तंदुरा हाथ रे,
रखियों रा जाया,
अरे अराधों गावे रोमापीर रे हा।।
अरें वें परों जूगडा में अमर नोम रे,
रखियों रा जाया,
अरें हंसे हंसे ने मीठो बोलनो रे हा।।
अरें गया परा धुंधलिये धोरों रें माय रें,
रखियो रा जाया,
अरे वेते मारगिये रोमत मोडियों रे हा।।
गायक – लक्ष्मण तंवर / मनीष परिहार।
प्रेषक – श्रवण जालोरी।








