किशोरी तेरे,
चरणन की रज पाऊँ।।
बैठी रहूँ कुंजन के कोने,
बैठी रहूँ कुंजन के कोने,
श्याम राधिका गाऊँ,
मैं श्याम राधिका गाऊँ,
किशोरी तेरें,
चरणन की रज पाऊँ।।
या रज को ब्रम्हादिक तरसत,
या रज को ब्रम्हादिक तरसत,
सौ रज शीश नवाऊ,
सौ रज शीश नवाऊ,
किशोरी तेरें,
चरणन की रज पाऊँ।।
व्यास स्वामिनी की छवि निरखूँ,
व्यास स्वामिनी की छवि निरखूँ,
विमल विमल जस गाऊँ,
विमल विमल जस गाऊँ,
किशोरी तेरें,
चरणन की रज पाऊँ।।
किशोरी तेरे,
चरणन की रज पाऊँ।।
Singer – Indresh Ji Upadhyay
Upload By – Kanhaiya Goswami
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