सावण री बड़ी तीज सहेलियां,
रुक्मण नावण जावे जी,
रुणक झुणक पग पायल बाजे,
सात सहेलिया संग जावे।।
और सहेलिया हीरा रे तीरा,
रुकमण बीच पधारी,
जब जल माय डूबण लागी,
याद कियो गिरधारी,
भुजा पकड़ हरी बाहर लाया,
आ कांई बात बिचारी।।
कौन गांव में जन्म कहिजे रानी,
कौन घरां अवतारी,
नानी रे खिची मां सुलक्षणी,
दादा जात पवारी,
कुनणापुर में जन्म कहीजे,
भीम घरां अवतारी।।
वाचा दे दो भीमजी री लड़की,
पछे घरे पधारों,
वाचा तो मैं जब हरी देवो,
रूप चतुरभुज धारो,
रूप चतुरभुज धारो बनवारी,
शोभा अनंत अपारी।।
ओरों रे तो घुड़ला सोवे,
आप गरुड़ असवारी,
शिव रा वाचा और बह्या वाचा,
वाचा कृष्ण मुरारी,
जन्मजन्म रा पति है मारा,
मैं अर्धगियां थारी।।
वाचा देकर रुकमा बाई,
रंग महल में आयी,
सामी मिलगी मात सुलक्षणी,
तूं कठे देर लगाई।।
सावण री बड़ी तीज सहेलियां,
रुक्मण नावण जावे जी,
रुणक झुणक पग पायल बाजे,
सात सहेलिया संग जावे।।
गायक – ओमकृष्ण बिश्नोई।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकड़ा।
9024909170








