साधु भाई सत्संग है सत नौका,
जे तेरी इच्छा है तीरने की,
फेर नहीं आवे ऐसा मौका।।
तन मन त्याग आवो सत्संग में,
रति मत रखो धोखा,
धोखा निवारण धारणा सांची,
आनंद आवे रें अनोखा,
साधुभाई सत्संग है सत नोका।।
संत री सत्संग में सतगुरु मिलिया,
जागा भाग मारा चोखा,
श्रवण लगाकर सुणलो शब्द ने,
बिणज होवें हीरों का,
साधुभाई सत्संग है सत नोका।।
ले उपदेश दोस मत दिज्यो,
मार्ग मिल्यों मुक्ति का,
चारों सेवा करो गुरु जी के,
अर्पण कटे पाप भव भव का,
साधुभाई सत्संग है सत नोका।।
वेद पुराण भागवत गीता,
यही है वचन सन्तों का,
रामधन हंस सत्संग में सुधरिया,
पद पाया निर्भय का,
साधुभाई सत्संग है सत नोका।।
साधु भाई सत्संग है सत नौका,
जे तेरी इच्छा है तीरने की,
फेर नहीं आवे ऐसा मौका।।
गायक – टीकूराम जी।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकड़ा।
9024909170








