मेरे गुरू बिना लागे,
सुनो देश सखी।।
आवण आवण गी कहा गया प्रभु,
कर गया कॉल अनेक,
गिणतां गिणांतां मेरी,
घसगी उंगलियों के रेख सखी,
म्हारे गुरू बिना लागें,
सुनो देश सखी।।
पंछी का वहां खोज नहीं,
किन संग भेजूं मैं संदेश सखी,
जै म्हाने कोई गुरु मिला दे,
तन मन कर दूं मैं पेश सखी,
म्हारे गुरू बिना लागें,
सुनो देश सखी।।
सुगरी ने नुगरी मिली,
बांगा फिका लाग्या बेण,
सुगरी ने जब सुगरी मिल गी,
मिल गई सैनां में सैन सखी,
म्हारे गुरू बिना लागें,
सुनो देश सखी।।
गुरु ढूंढन को मीरा गई रे,
कर लिया जोगण वाला भेस सखी,
ढुढत ढुढत ढूंढ लिया,
सिर गा तो धौला होग्या केश सखी,
म्हारे गुरू बिना लागें,
सुनो देश सखी।।
मेरे गुरू बिना लागे,
सुनो देश सखी।।
गायक – संत श्री बलराम जी डाल।








