सज्यो रे सज्यों रे थारो सिणगार,
सिणगार रे,,
ओ म्हारा सांवरिया,
ओ म्हारा सांवरिया।।
तर्ज – उड़ियो रे उड़ीयो।
सजधज बैठयो म्हारो,
सांवरो जी म्हारो सांवरो,
भगत करे है थारी मनवार,
मनवार रे,
ओ म्हारा सांवरिया,
ओ म्हारा सांवरिया।।
भजन सुनावा थाने रिझावां,
सांवरा जी प्यारा सांवरा,
आई दूर दूर से,
भगता री डार डार रे,
ओ म्हारा सांवरिया,
ओ म्हारा सांवरिया।।
खाटू में विराजे म्हारो,
सांवरो जी प्यारो सांवरो,
यो तो बैठ्यो बैठ्यो,
लुटा रह्यो भंडार भंडार रे,
ओ म्हारा सांवरिया,
ओ म्हारा सांवरिया।।
“नाथ गुलाब” थे म्हापे किरपा,
राखज्यों जी बाबा राखज्यों,
“विनय” खडया हा बाबा,
थारे द्वार द्वार रे,
ओ म्हारा सांवरिया,
ओ म्हारा सांवरिया।।
सज्यो रे सज्यों रे थारो सिणगार,
सिणगार रे,,
ओ म्हारा सांवरिया,
ओ म्हारा सांवरिया।।
गायक – संत श्री गुलाब नाथ जी महाराज।
लेखक – विनय कुमार तमोली।
लक्ष्मणगढ़।
मोबाइल – 9785064838








