गुरु गोरख तेरे चरणों में,
मेरा बार बार आदेश,
आके न दे दे मनै,
भगति का उपदेश।।
धुना जग रया तेरे नाम का,
बैठी भगतां की टोली,
हाथ में चिमटा कानों में कुण्डल,
कांधे ऊपर हो झोली,
आके दिखादे सूरत भोली,
तेरा देखूं भगमा भेष,
आके न दे दे मनै,
भगति का उपदेश।।
धुने आले नियम बता दे,
ल्याऊ मांग कै भिक्षा थारे संग म,
ना चाहिए मनै महल अटारी,
रहना चाहूं भगति के ढंग म,
रंग दिए मनै हरि रंग म,
मिटे दिल के बुरे द्वेष,
आके न दे दे मनै,
भगति का उपदेश।।
थारी सेवा से मेरे नाथ जी,
जीवन मेरा सुधर जावै,
जिस नर प हो थारी कृपा,
वो नर पार उतर जावै,
ना मानुष जन्म फेर पावै,,
मेरे काटो सकल कलेश,
आके न दे दे मनै,
भगति का उपदेश।।
गुरु राजेन्द्र तेरे बिना यू,
सुना सारा जग लागै,
उसका जीवन सफल र होजै,
जो मोह माया को त्यागै,
सुनील कुमार तू क्यों ना जागै,
तेरतै दे दिया शुभ संदेश,
आके न दे दे मनै,
भगति का उपदेश।।
गुरु गोरख तेरे चरणों में,
मेरा बार बार आदेश,
आके न दे दे मनै,
भगति का उपदेश।।
गायक & लेखक – सुनील कुमार लदानियां।
99961-23336








