उठो मुसाफिर बिस्तर बांधो,
गाड़ी आबा वाली है,
राम नाम को टिकट कटा लो,
घंटी बजबा वाली है।।
अक्ल को इंजन कर्म का कोयला,
धर्म का धुवां उड़ावे है,
पाप पुण्य का डब्बा लेकर,
अमरापुर चाली है,
राम नाम को टिकट कटा लो,
घंटी बजबा वाली है।।
मन गार्ड बुद्धि का ड्राईवर,
स्वांस को बिन बजावे है,
जल्दी आवो टेंशन ऊपर,
फेर न आबा वाली है,
राम नाम को टिकट कटा लो,
घंटी बजबा वाली है।।
वा टेंशन से गाड़ी छूटी,
ई टेंशन पर आई है,
ई टेंशन छूट गई तो,
फेर नही आबा वाली है,
राम नाम को टिकट कटा लो,
घंटी बजबा वाली है।।
ई गाड़ी में हर कोई बैठे,
राजा रंग भिखारी है,
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
गाड़ी अजब निराली है,
राम नाम को टिकट कटा लो,
घंटी बजबा वाली है।।
उठो मुसाफिर बिस्तर बांधो,
गाड़ी आबा वाली है,
राम नाम को टिकट कटा लो,
घंटी बजबा वाली है।।
गायक – चम्पा लाल प्रजापति।
मालासेरी डूंगरी 8947915979
( यूट्यूब – चारभुजा लाइव कालियास )








