थारे बिन मैया कुण म्हारो है राणीसती दादी भजन लिरिक्स

थारे बिन मैया कुण म्हारो है राणीसती दादी भजन लिरिक्स

थारे बिन मैया कुण म्हारो है,
थारे बिण मैया कुण म्हारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है।।

तर्ज – एक मुलाकात जरुरी है।



आज आओ मैया,

म्हा पे उपकार करो,
कष्ट हर लो अब सारा,
म्हारो उद्धार करो,
मैया सुनो आज अर्जी म्हारी,
करूँ आज अरदास दिल से थारी,
कोई ना म्हारो आज है,
काई से नाही आस है,
इक थारो ही है आसरो,
थारो है विश्वास है,
थारो है विश्वास है,
मनड़ो थाने ही अब पुकारयो है,
दादी थारो ही अब सहारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है।।



थारे दर पे म्हे आया,

मन में या आशा ल्याया,
आज तक थारी कृपा से ही,
काम सब होता आया,
माँ थारी शरण ही,
म्हे आवा हरदम,
लुटा दे तू खुशियां,
मिटा दे हर गम,
या जिंदगी की डोर मैया,
थारे ही हाथ है,
मिलेगी सारी खुशियां,
मिले जो थारो साथ है,
मिले जो थारो साथ है,
दास ‘अंकुश’ माँ थारो प्यारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है।।



थारे बिन मैया कुण म्हारो है,

थारे बिण मैया कुण म्हारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है,
दादी थारो ही अब सहारो है।।

स्वर – सौरभ मधुकर।


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