तेरा दरबार सजाया री,
मेरी मात कालका आजा,
मेरी मात कालका आजा रीं,
मेरी शेरों वाली आजा।।
तर्ज – चरखा परे हटा ले।
आज अगर तू ना आई तो,
होवे जगत हसाई,
यो सारी दुनिया ताने मारे,
झूठी से तेरी माई,
तेरा दरबार सजाया रीं,
मेरी मात कालका आजा।।
पान बतासे लोंग सुपारी,
भेट तेरी माँ लाए,
आकर भोग लगा मेरी मंईया,
ये अरदास है लाए,
तेरा दरबार सजाया रीं,
मेरी मात कालका आजा।।
कोड़ी कोड़ी जोड के मंईयां,
तेरा जगन रचाया,
कर ले री स्वीकार माँ अम्बै,
मन में घणा उम्हाया,
तेरा दरबार सजाया रीं,
मेरी मात कालका आजा।।
सुरेन्द्र सिंह निठौरा वाला,
गुण तेरा माँ गावे,
महर करेगी महरा वाली,
घर घर अलख जगावे,
तेरा दरबार सजाया रीं,
मेरी मात कालका आजा।।
तेरा दरबार सजाया री,
मेरी मात कालका आजा,
मेरी मात कालका आजा रीं,
मेरी शेरों वाली आजा।।
गायक / लेखक – सुरेन्द्र सिंह निठौरा।
9999641853








