श्याम की कृपा को पाकर,
अहम में फूल ना जाना,
झूठे रुतबे में आकर,
प्रभु को भूल ना जाना।।
तर्ज – मुसाफिर जाने वाले।
जो कुछ भी है पास में तेरे,
तुझको दिया है श्याम ने मेरे,
इसमें तेरा हाथ नहीं है,
तुझ में तो कोई बात नहीं है,
वहम के झूले में तू,
कभी भी झूल ना जाना,
झूठे रुतबे में आकर,
प्रभु को भूल ना जाना।।
तेरे घर के एक एक तिनके,
एहसानों से दबे है इनके,
इनकी कृपा से घर चल रहा है,
घर का चूल्हा भी जल रहा है,
मोह के भवसागर में,
कहीं तू डूब ना जाना,
झूठे रुतबे में आकर,
प्रभु को भूल ना जाना।।
तुझ पे कृपा जो बरस रही है,
दुनिया उसको तरस रही है,
कोई ना जाने कल तेरा क्या हो,
रख तू संभाल के इनकी दया को,
इनकी राहों से ‘माधव’,
कभी प्रतिकूल ना जाना,
झूठे रुतबे में आकर,
प्रभु को भूल ना जाना।।
श्याम की कृपा को पाकर,
अहम में फूल ना जाना,
झूठे रुतबे में आकर,
प्रभु को भूल ना जाना।।
Singer – Reshmi Sharma
Lyrics – Abhishek Sharma ‘Madhav’








