प्रथम पेज राजस्थानी भजन सतगुरु सेन बताय असल निज सार की भाई साधु

सतगुरु सेन बताय असल निज सार की भाई साधु

असल निज सार की भाई साधु,
सतगुरु सेन बताय,
सतगुरु सेंन बताय।।



सुरता शब्द विचार नुरत घर,

पहरा दीना,
पाँच पचीस ने मार,
अगम का मार्ग लीना,
अब जागो जागण देश में,
निर्भय गहरे रे निशान,
सात द्वीप नव खण्ड में रे,
नही शशि नही भान,
असल निज सार की भाई साधु,
सतगुरु सेंन बताय।।



अब घटा चढ़ि घनघोर,

बरसे कोई अम्रत धारा,
पीवे संत सुजान हरि का,
हरि जन प्यारा,
जन्म मरण आवे नही,
आवा गमन मिट जाय,
अटल धाम पर जा टिके रे,
संत अमर हो जाय,
असल निज सार की भाई साधु,
सतगुरु सेंन बताय।।



कैसा ये देश गुरु का,

ऐसा कहिये,
नही शशि नही भान,
वहां पर होत उजाला,
नही शशि नही भान,
उजाला घट माय,
मेहर हुई गुरुदेव की रे,
कर लिया रे बखान,
असल निज सार की भाई साधु,
सतगुरु सेंन बताय।।



सतगुरुसा सुखदास,

नवलगुरु ब्रह्म समाना,
बैठा आसन ढाल,
मुगत का देने वाला,
शरण कमल के मायने,
बोले ब्रह्म समाय,
बाहुबल तेरा टाल दी,
अगम निगम है अपार,
असल निज सार की भाई साधु,
सतगुरु सेंन बताय।।



असल निज सार की भाई साधु,

सतगुरु सेन बताय,
सतगुरु सेंन बताय।।

गायक / प्रेषक – श्यामनिवास जी।
9983121148


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