सर पे मेरे हाथ है,
फिर क्यो डरु मैं,
बाबोसा जो साथ है।।
तर्ज – जाने क्या बात है।
हरपल बनके चलता,
जो तेरा साया आ ..आ…आ,
हरपल बनके चलता,
जो तेरा साया,
जिन्दगी का सपना,
इसने सजाया,
हुई जबसे तेरी,
इनसे मुलाकात है।।
मुरझाई कलियाँ,
फिर से खिल रही है आ ..आ…आ,
मुरझाई कलियाँ,
फिर खिल रही है,
आंधियों में भी,
ज्योत जल रही है,
बाबोसा ही दे रहे,
ये सौगात है।।
जन्मों जनम का है,
कोई ये नाता आ ..आ…आ,
जन्मों जनम का है,
कोई ये नाता,
सुन रहा दिलबर,
तेरी हर दास्ता,
दिन ये सुहाने,
खुशियों भरी रात है।।
सर पे मेरे हाथ है,
फिर क्यो डरु मैं,
बाबोसा जो साथ है।।
गायिका – कृष्णा विजयवर्गीय कोटा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
(म्यूजिक डायरेक्टर एवम कंपोजर)
मो . 9820947184








