संईया सतगुरु मन भाया जी,
दोहा – नमो नमो गुरुदेव जी,
अन्तर्काल के बंद,
जल दरिया बन्धन करे,
नमो नमो मेरे भगवन।
सतगुरु के दरबार मे,
मन जाईये बारम्बार,
भुली जुगत बताय सी,
मेरे सतगुरु है दातार।
संईया सतगुरु मन भाया जी,
कृपा भई गुरुदेव की,
म्हाने दर्शन पाया जी।।
सुत्या जीव घोर नींद में,
गुरु आण जगाया जी,
सोहंग शब्द सुणाय के,
मेरा भ्रम मिटाया जी,
सैया सतगुरु मन भाया जी।।
कुमति हटी सुमति बढ़ी,
मन में धीरज आया जी,
मै जाता मजधार में,
गुरु आण बंचाया जी,
सैया सतगुरु मन भाया जी।।
सतगुरु दीन दया के सागर,
जग में आया जी,
खोल्या मोक्ष द्वार,
अगम की राह लखाया जी,
सैया सतगुरु मन भाया जी।।
लाधूदास मिल्या गुरु पुरा,
सत समझाया जी,
खिंवंदास सतगुरु की शोभा,
बधावा गाया जी,
सैया सतगुरु मन भाया जी।।
सईया सतगुरु मन भाया जी,
कृपा भई गुरुदेव की,
म्हाने दर्शन पाया जी।।
गायक – समुन्द्र चेलासरी।
मो. – 8107115329
प्रेषक – मनीष कुमार लौट।








