सब आरती करो,
रस प्रेम भरी।।
ब्रह्मा की करूं,
विष्णु की करूं,
लक्ष्मी की करूं रस प्रेम भरी,
सब आरती करों,
रस प्रेम भरी।।
नारद की करूं,
भोले बाबा की करूं,
गौरा की करूं रस प्रेम भरी,
सब आरती करों,
रस प्रेम भरी।।
गंगा की करूं,
यमुना की करूं,
सरयू की करूं रस प्रेम भरी,
सब आरती करों,
रस प्रेम भरी।।
रामायण की करूं,
भागवत की करूं,
गीता की करूं रस प्रेम भरी,
सब आरती करों,
रस प्रेम भरी।।
माता की करूं,
और पिता की करूं,
गुरुवर की करूं रस प्रेम भरी,
सब आरती करों,
रस प्रेम भरी।।
श्री कृष्ण की करूं,
बलदाऊ की करूं,
राधा की करूं रस प्रेम भरी,
सब आरती करों,
रस प्रेम भरी।।
सब आरती करो,
रस प्रेम भरी।।
गायक – रामनिवास शास्त्री जी।
प्रेषक – पंडित गोविंद प्रसाद मिश्र।
9838790165








