रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर,
दिनों का नाथ साँवरा,
लेगा तेरी खबर।।
तर्ज – मिलती है जिंदगी में।
कोई यहां नहीं तेरा,
आंसू जो पोंछ दे,
इस जग की रित है यही,
इतना तू सोच ले,
दुनियां को भुल श्याम से,
बस तु उम्मीद कर,
रोता है क्यूँ तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
सेठों का सेठ है यहां,
बैठा जो सामने,
ज़िनको भी देखो वो यहां,
आता है मांगने,
राजा हो य़ा हो रंक वो,
मांगे है बे फिकर,
रोता है क्यूँ तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
दर दर झुकाना शिश को,
अच्छा नहीं कहीं,
करता जो भगतों की फिकर,
दातार है वही,
इनकी कृपा हुई तभी,
आया तु द्वार पर,
रोता है क्यूँ तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
इस दर की बात क्या कहुँ,
आया जो हार कर,
हारे का साथी श्याम है,
लिखा है द्वार पर,
‘कैलाश’ पे यकीन कर,
चौखट पे रख दे सर,
रोता है क्यूँ तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर,
दिनों का नाथ साँवरा,
लेगा तेरी खबर।।
Singer – Kailash Sharma
9608722111








