पाखंड में कुछ नाही रे साधु भाई देसी भजन लिरिक्स

पाखंड में कुछ नाही रे साधु भाई,
पाखंड मे कुछ नाही रे,
पाखंडिया नर फिरे भटकता,
लख चौरासी माई रे,
अरे पाखंडिया नर फिरे भटकता,
लख चौरासी माई रे।।



ए मात पिता री सेवा करले,

देव थारे घर माई रे,
मात पिता री सेवा करले,
देव थारे घर माई रे,
घर का देव ने राजी करले,
जन्म सफल हो जाई रे,
घर का देव ने राजी करले,
जन्म सफल हो जाई रे।।



अरे एकादशी रो व्रत राखे,

पीपल पूजवा जाई रे,
एकादशी रो व्रत राखे,
पीपल पूजवा जाई रे,
माल मलूदा जीमे घनेरा,
फिर उपवास केवाई रे,
माल मलुदा जीमे घनेरा,
फिर उपवास केवाई रे।।



अरे धर्म धर्म तो सब कोई करता,

धर्म न जाणे नाही रे,
धर्म धर्म तो सब कोई करता,
धर्म न जाणे नाही रे,
पापी जिवडो मुख से बोले,
अब थाने किया समझाई रे,
पापी जिवडो मुख से बोले,
अब थाने किया समझाई रे।।



देखा देखी सब कोई साझे,

वाणे कुण समझावे रे,
देखा देखी सब कोई साझे,
वाणे कुण समझावे रे,
नेम धर्म री गाठ बांधलो,
सदा अमरापुर जाई रे,
नेम धर्म री गाठ बांधलो,
सदा अमरापुर जाई रे।।



राजा भरतरी राजा गोपीचंद,

नाथपंथ मे जाई रे,
राजा भरतरी राजा गोपीचंद,
नाथपंथ मे जाई रे,
नेम धर्म सु चाल्या जिवडा,
धर्म ने साथ निभाई रे,
नेम धर्म सु चाल्या जिवडा,
धर्म ने साथ निभाई रे।।



ए गली गली में ढुँढत फिरता,

नही कोई समझ में आयी रे,
गली गली में ढुँढत फिरता,
नही कोई समझ में आयी रे,
कहे कबीर सुनो भई साधु,
आ साची बात बतायी रे,
कहे कबीर सुनो भई साधु,
आ साची बात बतायी रे।।



पाखंड में कुछ नाही रे साधु भाई,

पाखंड मे कुछ नाही रे,
पाखंडिया नर फिरे भटकता,
लख चौरासी माई रे,
अरे पाखंडिया नर फिरे भटकता,
लख चौरासी माई रे।।

गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
9640557818


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