लिया भेख मर्दाना अवधू मन मेरा मस्ताना डुगरपुरी जी भजन

सतगुरू हाथ धरीया सिर उपर, सही-सही नाम सुणाया है, अमर जड़ी रा पिया प्याला, तोही-तोही तार मिलाया है, लिया भेख ...

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