आज तो मारो भाग खुलियो है,
मनड़ो घणो हर्षायो है,
म्हारो चारभुजा रो नाथ,
नगर में झूलबाने आयो है।।
पलक पावड़ा आज बिछावां,
जगमग जोत उजारी है,
गावां बधावा और ढोल बजावां,
भगता ने मन में धारी है,
घर घर बंदनवार बंधावां,
मनड़ो घणो हर्षायो है,
मारो चारभुजा रो नाथ,
नगर में झूलबाने आयो है।।
चाँदी को बेवान सजायो,
जीमे मूरत प्यारी है,
भगता री टोली संग चाले,
महिमा सब सु न्यारी है,
सब मिल जय-जयकार लगावां,
मनड़ो घणो हर्षायो है,
मारो चारभुजा रो नाथ,
नगर में झूलबाने आयो है।।
तुलसी संग भगवान विराजे,
जल झूलण की त्यारी है,
लाड लडावण थाने झुलावण,
आवे दुनिया सारी है,
सांगानेर रो गोरव गावे,
मनड़ो घणो हर्षायो है,
मारो चारभुजा रो नाथ,
नगर में झूलबाने आयो है।।
आज तो मारो भाग खुलियो है,
मनड़ो घणो हर्षायो है,
म्हारो चारभुजा रो नाथ,
नगर में झूलबाने आयो है।।
गायक – गौरव राव।
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