मारे नेणो मे राम रस छाय रहयो है

मारे नेणो मे राम रस छाय रहयो है

मारे नेणो मे राम रस,
छाय रहयो हैं,
छाय रहयो छाय रहयो,
छाय रहयो हैं,
मारें नेणों मे राम रस,
छाय रहयो हैं।।



जल बिच कमल,

कमल बिच कलीया,
कलीया मे भंवर,
लुभाय रहयो हैं,
मारें नेणों मे राम रस,
छाय रहयो हैं।।



दधि बिच शीप,

शीप बिच मोती,
मोती मे ज्योति,
जगाय रहयो हैं,
मारें नेणों मे राम रस,
छाय रहयो हैं।।



वन बिच बाग,

बाग बिच बंगला,
बंगला मे बलमो,
लुभाय रहयो है,
मारें नेणों मे राम रस,
छाय रहयो हैं।।



चन्द्र सखि मोहन बिन,

मोरे जीव घणो,
अकुलाय रहयो हैं,
मारें नेणों मे राम रस,
छाय रहयो हैं।।



मारे नेणो मे राम रस,

छाय रहयो हैं,
छाय रहयो छाय रहयो,
छाय रहयो हैं,
मारें नेणों मे राम रस,
छाय रहयो हैं।।

गायक एवं प्रेषक – लालाराम प्रजापत,
सिणधरी 9828353565
महादेव साउण्ड सिणधरी।


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