मन में कंवर देव सदा,
दौहा – नीलो घोड़ो हांसलो,
लालां जड़ी रे लगाम,
चढ घोड़े कंवर निसरया,
सारी दुनिया भरे सलाम।
मन में कंवर देव सदा,
चित आन बसो कंवर देवा,
नित हरदे मे ध्यान आपका,
सुबह शाम साजूं सेवा।।
मै बालक बुद्धिहीन शरण मे,
देव तुम्हारे आया,
शरण पड़े की रख लाज,
काज मेरा तूं करदे मनचाया,
नाव पड़ी मजधार बीच में,
पार करो बण खेवा,
नित हरदे मे ध्यान आपका,
सुबह शाम साजूं सेवा।।
मां नागण का कंवर लाडला,
बासक के घर जाया,
फुलवती के बीर कहिज्यो,
भक्तों के मन भाया,
देवो मे देव देवो से न्यारा,
दुध चढे थारे मेवा,
नित हरदे मे ध्यान आपका,
सुबह शाम साजूं सेवा।।
किकरिया मे धाम आपकी,
आठयूं का भरता मैला,
चार कूंट से आवे जातरी,
दुखी लोग मारे हेला,
सबका कष्ट हरो कंवर तुम,
सब घट के लखेवा,
नित हरदे मे ध्यान आपका,
सुबह शाम साजूं सेवा।।
पवन पुजारी प्रीत पुर्बली,
बलवन्त शरण तिहारी,
कृपा करो कंवर कृपाला,
विनती सुणो थे म्हारी,
निवाऊं माथ हम रहे साथ,
मत करना कंवर बिछैवा,
नित हरदे मे ध्यान आपका,
सुबह शाम साजूं सेवा।।
मन में कँवर देव सदा,
चित आन बसो कँवर देवा,
नित हरदे मे ध्यान आपका,
सुबह शाम साजूं सेवा।।
गायक – समुन्द्र लौट चेलासरी।
8107115329
लेखक – बलवन्त राम लौट।








