प्रथम पेज राजस्थानी भजन माही बीज ने सेवक सु कठे कठे पधारीया आई माताजी भजन

माही बीज ने सेवक सु कठे कठे पधारीया आई माताजी भजन

माही बीज ने सेवक,
सु कठे कठे पधारीया,
बेंगलुरु में बडेर,
दर्शन किना ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी।।



आई अनुयायी माता ज्योता जगावे,

आई अनुयायी माता ज्योता जगावे,
आरतीया मे ढोल नगाडा,
बाजे ओ माताजी,
आरतीया मे ढोल नगाडा,
बाजे ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी।।



घर तो भीकाजी रे आप माँ पधारीया,

घर तो भीकाजी रे आप माँ पधारीया,
भगतो रा भाग थे,
जगाया ओ माताजी,
भगतो रा भाग थे,
जगाया ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी।।



आई वाटिका घणी फुटरी आ लागे,

आई वाटिका घणी फुटरी आ लागे,
बेंगलुरु में चौदस खुशीयां,
छाई ओ माताजी,
बेंगलुरु में चौदस खुशीयां,
छाई ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी।।



‘लखन चौधरी’ माँ दास कहिजे थारो,

लखन चौधरी माता दास कहिजे थारो,
किशोर सुमन थारा कीर्तन,
एतो गावे ओ माताजी,
किशोर सुमन थारा हरिगुन,
गावे ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी।।



माही बीज ने सेवक,

सु कठे कठे पधारीया,
बेंगलुरु में बडेर,
दर्शन किना ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी,
भगत थारा घणा,
हर्षाया ओ माताजी।।

लेखक – लखन चौधरी।
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
9640557818


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