माई री मैं तो,
लियो साँवरिया मोल,
लियो मुरारी ने मोल।।
कोई कहे हलको,
कोई कहे भारो,
मैं तो लियो है,
तराजू तोल।।
कोई कहे सुगों,
कोई कहे मुगों,
मैं तो लियो है,
अमोलख मोल।।
कोई कहे छाने,
कोई कहे चोड़े,
मैं तो लियो है,
बजन्ता ढोल।।
कोई कहे कालों,
कोई कहे गोरो,
मैं तो लियो है,
अँखियाँ खोल।।
मीरा के प्रभु,
गिरधर नागर,
म्हारे पूरब,
जनम रो कोल।।
माई री मैं तो,
लियो साँवरिया मोल,
लियो मुरारी ने मोल।।
स्वर – मोहन जी झाला।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकड़ा।
9024909170








