कोई भक्त ना ऐसा होगा जैसा पवनपुत्र हनुमान लिरिक्स

कोई भक्त ना ऐसा होगा,
जैसा पवनपुत्र हनुमान,
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।।



अंजनी का लाडला,

और सिया का दुलारा है,
पवनपुत्र रामजी के,
आँखों का तारा है,
जो ध्यान धरे इनका,
उसका हो जाये पूरण काम,
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।।



महिमा न वरणी जाये,

अंजनी के लाला की,
मन में बसा लो छवि,
बजरंग बाला की,
अपने हिरदय को बनाया जिसने,
सियाराम का धाम,
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।।



बल अपार देह,

हेम शैल के समान है,
ज्ञानियों में ज्ञानी सारे,
गुणों के निधान हैं,
ये परमभक्त रघुवर के,
जपते हरदम सीताराम,
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।।



दरशन करा दो हनुमत,

हमें सीताराम से,
भक्ति जगा दो मन में,
प्रभु के ही नाम से,
प्रभु का सुमिरन करते-करते,
तर जाये ‘परशुराम’
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।।



कोई भक्त ना ऐसा होगा,

जैसा पवनपुत्र हनुमान,
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम।।

लेखक एवं प्रेषक – परशुराम उपाध्याय।
9307386438
स्वर – सौरभ उपाध्याय।