करो नजर महर की,
ओ बाबा,
धरो हाथ शीश पे,
ओ बाबा,
मेरी नाव पडीं मझधार,
बाबा पार लगा पार लगा।।
मैने छोड़ देई दुनिया सारी,
ये मतलब की रिश्ते दारी,
एक किया तेरा ऐतबार,
बाबा पार लगा पार लगा।।
मन मन्दिर में मुरत तेरी,
मैने आश करी तुझ से गहरी,
तू हो नीले अस्वार,
बाबा पार लगा पार लगा।।
दर दर की ठौकर खाई है,
कही होती ना सुनवाई है,
तुझे कब से रहा पुकार,
बाबा पार लगा पार लगा।।
सुरेन्द्र सिंह निठौरा वासी है,
बाबा जी तेरा मिराशी है,
तेरे हाथ मेरी पतवार,
बाबा पार लगा पार लगा।।
करो नजर महर की,
ओ बाबा,
धरो हाथ शीश पे,
ओ बाबा,
मेरी नाव पडीं मझधार,
बाबा पार लगा पार लगा।।
गायक – सुरेन्द्र सिंह निठौरा।
09999641853








