हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हो,
जीवन निरर्थक जाने ना पाए,
ये मन ना जाने क्या क्या दिखाए,
कुछ बन ना पाया मेरे बनाए,
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हों।।
ऐसा जगा दो फिर सो ना जाऊँ,
अपने को निष्काम प्रेमी बनाऊँ,
मैं आपको चाहूँ और पाऊँ,
संसार का कुछ भय रह ना जाए,
ये मन ना जाने क्या क्या दिखाए,
कुछ बन ना पाया मेरे बनाए,
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हों।।
वह योग्यता दो सत्कर्म कर लूँ,
अपने ह्रदय में सदभाव भर लूँ,
नर तन है साधन भव सिन्धु तर लूँ,
ऐसा समय फिर आए ना आए,
ये मन ना जाने क्या क्या दिखाए,
कुछ बन ना पाया मेरे बनाए,
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हों।।
संसार में ही आसक्त रह कर,
दिन रात अपने ही मतलब की कहकर,
सुख के लिए लाखों दुख सह कर,
ये दिन अभी तक यूँ ही बिताए,
ये मन ना जाने क्या क्या दिखाए,
कुछ बन ना पाया मेरे बनाए,
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हों।।
हे दाता हमें निरभिमानी बना दो,
दारिद्र हर लो दानी बना दो,
आनन्दमय विग्यानी बना दो,
मै हूँ पथिक ये आशा लगाए,
ये मन ना जाने क्या क्या दिखाए,
कुछ बन ना पाया मेरे बनाए,
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हों।।
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हो,
जीवन निरर्थक जाने ना पाए,
ये मन ना जाने क्या क्या दिखाए,
कुछ बन ना पाया मेरे बनाए,
हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हों।।
Singer – Harshit Prakash Mali
Lyrics – Pandit Satyapal Ji “Pathik”








