हाथ कस के पकड़ ले मेरा सांवरे भजन लिरिक्स

हाथ कस के पकड़ ले मेरा सांवरे भजन लिरिक्स

हाथ कस के पकड़ ले मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ।

तर्ज – हाल क्या है दिलों का ना।

श्लोक – तेरी करुणा की घनी छाँव में,
जी लगता है,
सांवरे अब तो तेरे,
गाँव में जी लगता है,
अश्क रुकते नहीं,
आँखों में मेरी रोके से,
इनका तो बस,
तेरे पांवों में जी लगता है।

 

हाथ कस के पकड़ ले,
मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ,
मेरी हार साँस पे,
श्याम लिख इस तरह,
मैं मिटाना भी चाहूँ,
मिटाना ना सकूँ,
हाथ कस के पकड ले,
मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ।।



मुझको लूटने का डर,

जग के मेले में है,
पाँच डाकू भी संतो के,
रेले में है,
ठगनी माया की,
मीठी सी बातो में मैं,
कभी आना भी चाहूँ तो,
आ ना सकूँ,
हाथ कस के पकड ले,
मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ।।



हाथ में तेरे जब तक,

मेरा हाथ है,
मुझको छुले कोई,
किसकी औकात है,
श्याम प्यारे तू,
सदा मेरे साथ है,
मैं भूलाना भी चाहूँ,
भुला ना सकूँ,
हाथ कस के पकड ले,
मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ।।



श्याम ‘संदीप’ को तू,

बना बांसुरी,
(तेरे हाथो में बन के रहूं बांसुरी,)
नाचू छम छम छमाछम,
सर किसी और दर पे,
कभी सांवरे,
मैं झुकना भी चाहूँ,
झुकाना सकूँ,
हाथ कस के पकड ले,
मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ।।



हाथ कस के पकड़ ले मेरा सांवरे,

मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ,
मेरी हार साँस पे,
श्याम लिख इस तरह,
मैं मिटाना भी चाहूँ,
मिटाना ना सकूँ,
हाथ कस के पकड ले,
मेरा सांवरे,
मैं छुड़ाना भी चाहूँ,
छुड़ाना सकूँ।।

Singer : Sandeep Bansal


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