देर से आने की तेरी आदत बाबा बहुत पुरानी है भजन लिरिक्स

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देर से आने की तेरी आदत बाबा बहुत पुरानी है भजन लिरिक्स

देर से आने की तेरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है,
तब आता है तू जब सर से,
ऊपर उठता पानी है,
देर से आने की तेंरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है।।



बीच सभा में,

बीच सभा में लुटने लगी जब,
द्रोपदी तुम्हे पुकारी थी,
सर को झुकाए बैठा कुटुंब था,
तुमने बढाई साड़ी थी,
भाई बहन के,
भाई बहन के प्यार की ये तो,
अद्भुत सत्य कहानी है,
देर से आने की तेंरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है।।



नगर सेठ,

नगर सेठ कहलाए नरसी,
भजन फकीरी में डोले,
भात भरण को पहुँच गए थे,
तम्बूरा ले जय बोले,
भात मायरा,
भात मायरा भरने आए,
जब गई डूबने नानी है,
देर से आने की तेंरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है।।



महलों की रानी,

महलों की रानी मीराबाई,
इकतारा ले भजन किया,
राजा राणा बैरी हो गया,
उसने वार पे वार किया,
पी गई,
पी गई दूध का प्याला मीरा,
जहर बनाया पानी है,
देर से आने की तेंरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है।।



विप्र सुदामा,

विप्र सुदामा बनके याचक,
जब तेरे द्वार पे आया था,
हे गोपाल तब जाकर के,
तूने उसे अपनाया था,
पहले क्यूँ ना,
पहले क्यूँ ना बरसाते जब,
श्याम कृपा बरसानी है,
देर से आने की तेंरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है।।



देर से आने की तेरी आदत,

बाबा बहुत पुरानी है,
तब आता है तू जब सर से,
ऊपर उठता पानी है,
देर से आने की तेंरी आदत,
बाबा बहुत पुरानी है।।

Singer – Mandeep Jhangra