देखो कलयुग की परछाई,
दुनिया बिगड़ गई रे भाई।।
चाय बीडी अमल छूतरा,
दारू माँस गिटकाई,
पान सुपारी जर्दा गुटका,
तनमन की राख उड़ाई।।
मात पिता के जूता देवे,
डसे माँ जाया भाई,
अदालत में दावो कीनो,
यारां को न्यूत जिमाई।।
आई घर वाली मायत सें न्यारो,
हुक्म बैठी चलाई,
रोती जावे बहन बेटी,
शाली को बेस पहनाई।।
दया धर्म छोडी कुल कागो,
करे नित आस पराई,
कुसंगत में नित उठ जावे,
नित बढ़े अकडाई।।
बूढा ढोकरा टाबर टोली,
बिगडग्या लोग लुगाई,
सुवाराम भजन में राजी,
नही माने तो राम दुहाई।।
देखो कलयुग की परछाई,
दुनिया बिगड़ गई रे भाई।।
गायक – मनोहर परसोया।








