दुनिया में साँचा ये द्वार देखलो,
भक्तो की लम्बी कतार देखलो,
बालाजी के रूप में बैठे है बाबोसा,
चुरू और दिल्ली का दरबार देखलो,
भक्तो की वहाँ भरती है झोलियाँ,
नित रोज रोज नये चमत्कार देखलो।।
बाबोसा के नाम से हो जाते हर काम है,
श्रद्धा से जो भी आते इनके धाम है,
एक नही लाखो की बनी है तकदीर,
दानी ऐसा दयालु दातार देखलो,
दुनिया में साँचा ये द्वार देखलो।।
देव ऐसा दूजा नही देखा कलयुग में,
पल भर में ही किस्मत को पलट दे,
करिश्मा नया रोज होता यहाँ,
देता खुशिया ये झोली पसार देखलो,
दुनिया में साँचा ये द्वार देखलो।।
आया जो शरण में सदा सुख पायेगा,
बाबोसा की कृपा से मौज मनायेगा,
लुटा रहा भगतो पे प्यार बाबोसा,
ऐसा सुंदर मेरा सरकार देखलो,
दुनिया में साँचा ये द्वार देखलो।।
कृष्णा के भाव ये शब्दो की माला है,
बाईसा के हाथो से पहने चुरू वाला है,
बाबोसा से मिली पहचान भक्तो,
ऐसा प्यारा ” दिलबर ” दिलदार देखलो,
दुनिया में साँचा ये द्वार देखलो।।
दुनिया में साँचा ये द्वार देखलो,
भक्तो की लम्बी कतार देखलो,
बालाजी के रूप में बैठे है बाबोसा,
चुरू और दिल्ली का दरबार देखलो,
भक्तो की वहाँ भरती है झोलियाँ,
नित रोज रोज नये चमत्कार देखलो।।
गायिका – कृष्णा विजयवर्गीय कोटा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
(म्यूजिक डायरेक्टर एवम कंपोजर)
मो . 9820947184








