चेत रे नर चेत,
जन्म नहीं आवे।
दोहा – चेत रे नर चेत लोभी,
जीव तू चेत रे नर चेत लोभी,
फेर जन्म नहीं आवेलो,
राम भजन नहीं करेला,
चौरासी में गोता खावेलो।
चेत रे नर चेत,
जन्म नहीं आवे जन्म नहीं आवे,
या मनक जन्म री मौज,
फेर नहीं आवे।।
हे जी करलें सदा सत्संग,
समझ मन आवे समझ मन आवे,
इण सत संगत री मौज सु,
सागर तर जावें हो।।
संता की शरण चोरासी,
टल जावें चोरासी टल जावें,
नहीं तो भ्रम रे माय,
गुड़ीन्दा खावे हे हां।।
काई सुता रे जाग,
गुरुजी जगावें गुरुजी जगावें,
समय गया रे बाद,
फेर पछतावें हे हां।।
गुरु मिल्या गुलाबी नाथ,
परम पद पावे परम पद पावे,
पद गावे भवानो,
मौज भर आवे।।
चेत रे नर चेत,
जन्म नहीं आवे जन्म नहीं आवे,
या मनक जन्म री मौज,
फेर नहीं आवे।।
गायक – बावजी श्री धनराज जी जोशी।
प्रेषक – लोकेश गाडरी खेमाणा।
7850970321








