अर्थी सजेगी,
एक दिन तुम्हारी,
जब होगी विदाई,
चार जना मिली,
कांधे उठायी,
जब होगी विदाई,
होगी विदाई।।
तर्ज – लम्बी जुदाई।
सूत नारी धन,
पास नहीं रे,
कोई किसी का यहां,
खास नही रे,
अपने ही तेरे,
अपने ही तेरे,
मुख आग लगायी,
होगी विदाई,
चार जना मिली,
कांधे उठायी,
होगी विदाई,
होगी विदाई।।
पंछी तो उड़ गया,
पिंजरा को छोड़ के,
काम न आया कुछ,
चला मुख मोड़ के,
भवन भी उची,
भवन भी उची,
तेरे काम न आई,
जब होगी विदाई,
चार जना मिली,
कांधे उठायी,
होगी विदाई,
होगी विदाई।।
कुछ नेकिया कर ले,
जाने से पहले,
जाने से पहले,
प्रभु का भजन कर दम,
निकलने से पहले,
निकलने से पहले,
परदेसी कर ले,
परदेसी कर ले,
सब की भलाई,
जब होगी विदाई,
चार जना मिली,
कांधे उठायी,
होगी विदाई,
होगी विदाई।।
अर्थी सजेगी,
एक दिन तुम्हारी,
जब होगी विदाई,
चार जना मिली,
कांधे उठायी,
जब होगी विदाई,
होगी विदाई।।
गायक – राजू परदेसी।
प्रेषक – योगेश गोविंदानी।
मन्दसौर मध्यप्रदेश।
7999175040








