जपते जपते तेरे दर पे,
आ गए है,
तेरा नाम जपते जपते।।
तर्ज – चलते चलते यूँ ही कोई।
तुम दानी हो दयालु,
ये पुराण कह रहा है,
ये पुराण कह रहा है,
तूने दुनिया बाँट दी है,
यूँ ही दान करते करते,
यूँ ही दान करते करते,
तेरे दर पे आ गए है,
तेरा नाम जपते जपते।।
वो चारो वेद तूने,
ब्रम्हा को दे दीये थे,
ब्रम्हा को दे दीये थे,
विष्णु को दे दी लक्ष्मी,
सम्मान करते करते,
सम्मान करते करते,
तेरे दर पे आ गए है,
तेरा नाम जपते जपते।।
सागर से मिला जो अमृत,
देवो को दे दिया था,
देवो को दे दिया था,
खुद पी गए थे शिवजी,
लहरी जहर हस्ते हस्ते,
लहरी जहर हस्ते हस्ते,
तेरे दर पे आ गए है,
तेरा नाम जपते जपते।।
दे दर्श ओ दयालु,
तेरे द्वारे आ खड़े है,
तेरे द्वारे आ खड़े है,
ये विनती है भवर की,
प्रणाम करते करते,
प्रणाम करते करते,
तेरे दर पे आ गए है,
तेरा नाम जपते जपते।।
जपते जपते तेरे दर पे,
आ गए है,
तेरा नाम जपते जपते।।
स्वर – श्री गोपाल जी बजाज।
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