मालवई माता रे,
आओ रे आओ,
माता के दरबार में,
गरबा रमाओ,
कालका माता रे,
आओ रे आओ,
माता के दरबार में,
गरबा रमाओ।।
मालवा की धरती पे,
ज्योत जगमगाए,
माँ मालवई के नाम से,
मनवा हरषाए,
लाल चुनरिया ओढ़े,
मैया मुस्काए,
ढोल नगाड़े बाजे,
गरबा रंग जमाए।।
घूमर घूमर घूमे,
मैया की सवारी,
झांझर बाजे छन-छन,
रात लगे प्यारी,
सारेगामा की धुन में,
झूमे नर-नारी,
मालवई माता की,
जय हो जयकारी।।
मालवई माता रे,
आओ रे आओ,
माता के दरबार में,
गरबा रमाओ,
कालका माता रे,
आओ रे आओ,
माता के दरबार में,
गरबा रमाओ।।
लेखक – गौरव वाणी।
7974906066
माँ सारेगामा ऑर्केस्ट्रा ग्रुप।








