एक बार माजीसा,
मेहर थे कर दो,
टाबरिया रे घर में,
पगलिया थे करदो,
कृपा करो मेरी माँ,
मेहर करो मेरी माँ।।
तर्ज – छुप गया कोई रे।
था बिन सुणो सुणो,
आंगणियो है म्हारो,
सुणके पुकार माजीसा,
वेगा पधारो,
आस मिलाण री म्हाने,
पूरी थे करदो,
टाबरिया रे घर में,
पगलिया थे करदो,
कृपा करो मेरी माँ,
मेहर करो मेरी माँ।।
थे ना सुणो तो माजीसा,
किणने सुणावा,
सुख दुख री बाता म्हे तो,
थाने ही बतावां,
हिवड़े लगाके मैया,
सर पे हाथ धर दो,
टाबरिया रे घर में,
पगलिया थे करदो,
कृपा करो मेरी माँ,
मेहर करो मेरी माँ।।
रात अमावस की ज्यो,
छायो अंधीयारों है,
करदो तेरस वालो,
फेर उजियारो है,
नजर कृपा की माजीसा,
एक बार कर दो,
टाबरिया रे घर में,
पगलिया थे करदो,
कृपा करो मेरी माँ,
मेहर करो मेरी माँ।।
कुमकुम पगलिये माजीसा,
आप पधारो,
थारो ही भरोसो म्हाने,
थारो ही सहारो,
केवे कन्हैयो “दिलबर”,
झोली आज भरदो,
टाबरिया रे घर में,
पगलिया थे करदो,
कृपा करो मेरी माँ,
मेहर करो मेरी माँ।।
एक बार माजीसा,
मेहर थे कर दो,
टाबरिया रे घर में,
पगलिया थे करदो,
कृपा करो मेरी माँ,
मेहर करो मेरी माँ।।
गायक – कन्हैया वैष्णव हैदराबाद।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365







