ऊँचा कैलाश पे दिवलो,
प्रेम से ज्योति जले,
जहाँ भोला शंकर पार्वती माँ,
चौसर खेले।।
पास में बैठा नंदी डमरू बजावे,
भगत भी द्वारा पर शीश नचावे,
सावन में जो दर्शन पावे,
तो भाग्य खुले,
जहाँ भोला शंकर पार्वती माँ,
चौसर खेले।।
अजब सी लीला भोलेनाथ ने दिखाई,
प्रेम की महिमा हम सबको सिखाई,
सावन में जो प्रेम की बांसुरी बजे,
जहाँ भोला शंकर पार्वती माँ,
चौसर खेले।।
ऊँचा कैलाश पे दिवलो,
प्रेम से ज्योति जले,
जहाँ भोला शंकर पार्वती माँ,
चौसर खेले।।
गायक – धर्मेंद्र राजपूत।
संपर्क – 7049440533








