देख छवि सांवरी सी,
मैं तो हुई बावरी सी,
मेरे मन को वही भा गया.
मोहे सांवरा पसंद आ गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया।।
यमुना तट पे बंसी वट पे,
दिखने लगा वो हर पनघट पे,
मेरे आगे पीछे डोले,
मोहे गोपी गोपी बोले,
मीठी बंसी सुना वो गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया।।
मुरली मनोहर नटवर सुंदर,
मन को चुरा ले एक नज़र पर,
मेरे नैनो में समाए,
मेरी नींदों में भी आए,
मेरे सपनों में वो छा गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया।।
देखा जो रूप तेरा,
कमली सी हो गई,
कमली सी हो गई,
पगली सी हो गई,
ओ तेरा सुंदर शृंगार,
तेरे नैनों में प्यार,
मेरे ह्रदय में बसता गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया।।
देख छवि सांवरी सी,
मैं तो हुई बावरी सी,
मेरे मन को वही भा गया.
मोहे सांवरा पसंद आ गया,
मोहे साँवरा पसंद आ गया।।
गायक – जगतगुरु श्री श्यामशरण देवाचार्य जी।
प्रेषक – शेखर चौधरी।
मो – 9754032472








