सब के गुण अपनी हमेशा,
गलतियां देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
हसरते महलों की गर,
तुमको सताएं आनकर,
कुछ गरीबों की भी जाकर,
बस्तियां देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
खाने से पहले अगर तुम,
हक पराया सोच लो,
कितने भूखों की है इनमे,
रोटियाँ देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
आ दबोचे गर कहीं,
तुमको सिकंदर सा गुरूर,
हाथ खाली आते जाते,
अर्थियाँ देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
ये जवानी की अकड़ सब,
ख़ाक में मिल जायेगी,
जल चुके जो शव हैं उनकी,
अस्थियां देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
विषयों का विषपान कर,
झूठे नशे में चूर हो,
प्रेम का इक जाम पीकर,
मस्तियाँ देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
जिन्दगी में चाहते हो,
सुख अगर अपने लिए,
दूसरों के गम में अपनी,
सिसकियाँ देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
सब के गुण अपनी हमेशा,
गलतियां देखा करो,
जिंदगी में हुबहू कुछ,
झलकिया देखा करो।।
स्वर – स्वामी रामदेवजी महाराज।
प्रेषक – ओमनारायण जी ठाकुर।
9713517715








