जग में पैसा की लड़ाई,
दोहा – पर धन जलती आग है,
कोई लगावे हाथ,
बिना प्रेम चीमटा सुवा,
करे जलाकर राख।
जग में पैसा की लड़ाई,
पैसा है प्राणों से प्यारा,
कैसा खेल रचाई।।
पैसा प्रेम तुडावे में पल,
पैसो देय मरवाई,
भाई भाई को न्यारा करदे,
बूढा को परणाई।।
बुढापा में सेवा करावे,
कुल को देवे खपाई,
पैसा गुलाम बणायाँ राखे,
पैसो घणु भटकाई।।
पैसा सेठ कहावे मोटा,
और बढे अकडाई,
कचहरी में जीत करावे,
पैसो देवे पिटवाई।।
पैसा को यू जाणों ज्यूँ,
नाता की लुगाई,
खुद का धणी को जहर पिलावे,
झगडो देवे चुकाई।।
कफन माही जेब नही है,
खाली हाथ सब जाई,
सुवा राम नाम धन जौडो,
मिट जावे सभी लडाई।।
जग में पैसा की लडाई,
पैसा है प्राणों से प्यारा,
कैसा खेल रचाई।।
गायक – मनोहर परसोया।








