जाये कहाँ बाबोसा,
तेरे दर से।।
बरस रही है जो कृपा तेरी,
ढल गई दुखो की रात अँधेरी,
इस छोर से उस छोर तक,
तुमने ही दि है दिल पे दस्तक,
झुका है तेरे चरणों मे मस्तक,
तेरे ही है तेरे ही रहेंगे मेरे नाथ,
जाये कहां बाबोसा,
तेरे दर से।।
हमको लगन तेरी लागी,
दिल मे भक्ति ज्योत जागी,
माना की हम नहीं है काबिल,
जीवन ये तुमको ही अर्पित,
दिल बार बार कहे मेरे प्रभुवर,
जाये कहां बाबोसा,
तेरे दर से।।
कृपा जो तेरी हो गई,
ये दुनिया ही बदल गई,
हम तो है अब तेरे हवाले,
बाबोसा मेरे चूरू वाले,
होटो पे नाम रहे,
बस तेरा तेरा “दिलबर”
जाये कहां बाबोसा,
तेरे दर से।।
जाये कहाँ बाबोसा,
तेरे दर से।।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री अजय कुमार गोलेच्छा।
हैदराबाद।








