जी भर के तुम दर्शन कर लो,
राधा कृष्ण मुरारी के,
जीवन अपना सुफल बनाओ,
चरणन में सिर डारी के,
जी भरके तुम दर्शन करलों,
राधा कृष्ण मुरारी के।।
तर्ज – नगरी नगरी द्वारे द्वारे।
प्यारे के सिर पर मोर मुकुट है,
नैनन तिरछी कटारी है,
नैनन तिरछी कटारी है,
प्यारी के सिर पर चुनरी सोहे,
लट घुंघराली काली है,
लट घूंगराली काली है,
फूलन के दो माला पहरे,
फूलन कुंडल कान के,
जी भरके तुम दर्शन करलों,
राधा कृष्ण मुरारी के।।
प्यारी पहरे कुसुमल साड़ी,
मुरारी कमरिया कारी है,
मुरारी कमरिया कारी है,
हाथों में कंगन पैरों में पायल,
अद्भुत शोभा न्यारी है,
अद्भुत शोभा न्यारी है,
ईत्तर लगावे चंपा चमेली,
और गुलाब गुल नारी के,
जी भरके तुम दर्शन करलों,
राधा कृष्ण मुरारी के।।
‘अभिषेक’ तो बली बली जावे,
ऐसो रूप निहारी के,
ऐसो रूप निहारी के,
सबकुछ अपना न्योछावर करदो,
युगल जोड़ी सरकार पे,
युगल जोड़ी सरकार पे,
मुझे बना लो सेवक श्रीजी,
अपने इस दरबार के,
जी भरके तुम दर्शन करलों,
राधा कृष्ण मुरारी के।।
जी भर के तुम दर्शन कर लो,
राधा कृष्ण मुरारी के,
जीवन अपना सुफल बनाओ,
चरणन में सिर डारी के,
जी भरके तुम दर्शन करलों,
राधा कृष्ण मुरारी के।।
स्वर – अभिषेक तिवारी जी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








