शरण में तेरी जो भी आए,
दोहा – मोक्षदायिनी अवंतिका,
क्षिप्रा जल की धार,
पाप कटे मुक्ति मिले,
बाबा महाकाल दरबार।
अकाल मृत्यु वो मरे,
जो काम करे चंडाल का,
और काल उसका क्या बिगाड़े,
जो भक्त हो महाकाल का।
शरण में तेरी जो भी आए,
यही वो कहता जाए,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय।।
महाकाल है गिरजा शंकर,
अंतर्यामी है गंगाधर,
लीला अपरंपार है इनकी,
लीला अपरंपार है इनकी,
कोई समझ ना पाए,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय।।
सिर पर जटा जटा में गंगा,
सुमिरन से मन होता चंगा,
रूप है तेरा अनोखा भोले,
रूप है तेरा अनोखा भोले,
सभी के मन को भाय,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय।bd।
कर में तो त्रिशूल खड़ा है,
कंठ में तेरे नाग बड़ा है,
वाहन तेरा बना नांदिया,
वाहन तेरा बना नांदिया,
मन ही मन मुस्काए,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय।।
हे नटराज दया के सागर,
भक्तों के दुःख दूर भगाकर,
बांटे दुनिया भर में अमृत,
बांटे दुनिया भर में अमृत,
महिमा कही ना जाए,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय।bd।
शरण मे तेरी जो भी आए,
यही वो कहता जाए,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय,
भोला ॐ नमः शिवाय,
भोला ॐ नमःशिवाय।।
प्रेषक – विजय पाटीदार।
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