होरी सतगुरु ज्ञान दियो री ऐ,
जीव ईश रो भेद मिटाकर,
पूर्ण ब्रह्म कीयोरी ऐ,
होरी सतगुरु ज्ञान दियोरी।।
निज स्वरुप भूलकर भटकयो,
अजीया संग रच्योरी ऐ,
भेदा भाव छुटासी सतगुरु,
सिह और सिंग मिल्योरी ऐ होरी,
सतगुरु ज्ञान दियोरी ऐ।।
मै हूं गुण गो चरखा साथी,
अविधा भ्रम मिटयोरी ऐ,
रोम प्रकाश भया दस दस मे,
प्रबध दोष भगयोरी ऐ होरी,
सतगुरु ज्ञान दियोरी ऐ।।
सत चित आनन्द शुद्ध स्वरूप,
गुणों अतीत रयोरी ऐ,
मेरी सता सब मांही व्यापक,
अन्दर बहार मिल्योरी ऐ होरी,
सतगुरु ज्ञान दियोरी ऐ।।
श्योम प्रकाशी सबका दृष्टा,
केवल नीज थियोरी ऐ,
श्योम मलूक आप ना दूजा,
ना कोई आयो गियोरी ऐ होरी,
सतगुरु ज्ञान दियोरी ऐ।।
होरी सतगुरु ज्ञान दियो री ऐ,
जीव ईश रो भेद मिटाकर,
पूर्ण ब्रह्म कीयोरी ऐ,
होरी सतगुरु ज्ञान दियोरी।।
गायक – सहीराम भाट सूरतगढ़।
मो.- 8107115329
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।








