ओ मन क्यों नी माने,
मैं लाख लगायों जोर,
राम नाम ना भावे,
भागे विषयों की ओर,
ओ मन क्यों नी माने,
मैं लाख लगायों जोर।।
तर्ज – सावन का महीना।
इतरो अनाड़ी मन ज्यूं,
मच्छरेडों घोड़ो,
बुरे कर्मा में जावे,
मुंडे नहीं मोडयो,
ओ कर्म धर्म नी जाणे,
ओ जावे छाती जोर,
राम नाम ना भावें,
भागे विषयों की ओर।।
राम नाम भुल्यों बंदा,
आयो जिस काम ने,
स्वार्थ की नगरी बसाई,
भूल्यो निज नाम ने,
इण स्वार्थ की नगरी में,
बसे घणा ही चोर,
राम नाम ना भावें,
भागे विषयों की ओर।।
ओ मनडों तो केवे घणी करूं,
मोटर री सवारी,
करोड़ा माथे माया होवे,
आच्छी हो अटारी,
ओ मोह माया के जाल में,
फसतो ही जावे और,
राम नाम ना भावें,
भागे विषयों की ओर।।
जे जीव तू मोक्ष चावे,
राम नाम जाणले,
मन की बाता छोड़ सांचे,
ब्रह्म ने पहचाण ले,
माहीराम केवे इण बाता रो,
एक ही निचोड़,
राम नाम ना भावें,
भागे विषयों की ओर।।
ओ मन क्यों नी माने,
मैं लाख लगायों जोर,
राम नाम ना भावे,
भागे विषयों की ओर,
ओ मन क्यों नी माने,
मैं लाख लगायों जोर।।
गायक – मनोज इंदौरा (श्रीगंगानगर)
मोबाइल – 8209157287
सौजन्य से – संत मलूक दास जी।








