गया जब मैं खाटू,
सब हार कर,
गले से लगाया तुमने,
पुचकार कर।।
जहां में अकेला सा,
जब हो गया था,
जो नहीं होना था,
वो सब हो गया था,
तेरे दर पे आया बाबा,
थक हार कर,
गया जब मै खाटू,
सब हार कर।।
चौखट तुम्हारी बाबा,
जबसे मिली है,
जीवन की बगिया मेरी,
तबसे खिली है,
नजरे कृपा की कर दी,
परिवार पर,
गया जब मै खाटू,
सब हार कर।।
सेवा में तेरी मै,
हरदम रहूंगा,
कृपा की जो तूने वो,
सबसे कहूंगा,
दास कन्हैया को,
स्वीकार कर,
गया जब मै खाटू,
सब हार कर।।
गया जब मैं खाटू,
सब हार कर,
गले से लगाया तुमने,
पुचकार कर।।
गायक / लेखक – कन्हैया झा।
9887969109
(इस भजन को ‘बहुत प्यार करते है‘
धुन पर भी गाया जा सकता है।)








