हरि जी मैंने तुम संग प्रीत लगाई,
दोहा – जो आप ठुकराओगे तो प्यारे,
हम और कहाँ फिर जाएंगे,
छान कर ख़ाक ज़माने भर की,
फिर लौट यहीं पर आएँगे।
नीच अधम कामी कुटिल,
अरे जैसो हूँ मैं तोय,
नीज चरणन में राखिए,
मोहे नटवर नन्द किशोर।
नटवर नन्द किशोर मेरे,
प्राणो से प्यारे,
छोड़ जगत का मोह,
पड़ा मैं तेरे द्वारे।
यार कोई नहीं मिले मुझे,
इस भव सागर के बिच,
दाता अपना लो अभी,
हरी मैं अधम अति हूँ नीच।
बन गई तेरी प्रेम दीवानी,
लोक लाज बिसराई,
हरि जी मैंने तुम संग प्रीत लगाई,
नाथ मैंने तुम संग प्रीत लगाई,
श्याम मैंने तुम संग प्रीत लगाई।bd।
तर्ज – हरि मैं जैसो तेसो तेरो।
बन गई तेरी प्रेम दीवानी,
कोई कहे पगली कोई अंजानी,
प्रेम डोर से बंधी मैं सांवरिया,
प्रेम डोर से बंधी मैं सांवरिया,
लोक लाज बिसराई,
नाथ मैंने तुम संग प्रीत लगाई,
श्याम मैंने तुम संग प्रीत लगाई।bd।
भूल गई कहीं आना जाना,
सूना लगता सारा ज़माना,
लाखों अधम उबारे तूने,
लाखों अधम उबारे तूने,
अब मेरी बारी आई,
नाथ मैंने तुम संग प्रीत लगाई,
श्याम मैंने तुम संग प्रीत लगाई।bd।
बन गई तेरी प्रेम दीवानी,
लोक लाज बिसराई,
हरि जी मैने तुम संग प्रीत लगाई,
नाथ मैंने तुम संग प्रीत लगाई,
श्याम मैंने तुम संग प्रीत लगाई।bd।
Singer – Surbhi Chaturvedi








